खुला आसमां है उड़ने की जगह है
हम उन्हें ढूंढ रहे हैं न जाने वो कहां हैं
इतनी आजादी है कि जहां चाहे जा सकते हैं
पर उसे एक चेहरे पे लगा जैसे मेरा पूरा जहां है
वो मिल जाए मुझे तू उसे अपने पास बिठा लूं
ना जाने दूँ उसे ना ढूंढू मेरा घर कहां है
उसके संग मैंने कई ख्वाब सजा रखे हैं
वो तो अधूरे ही हैं अभी पूरे कहां हैं
मुझे पूरा करदो यूँ अधूरा नहीं रहा सकता
मैं तो कब से यही पे हूँ, बता तू कहां है
-सतीश कुमार

0 Comments:
Post a Comment