तुम्हें चाहेंगे तुम पे अपना हक़ भी जतायेंगे
तुम जितना दूर रहोगे,तुम्हारा उतना करीब आएंगे
तुमसे दूर जाना होता है तो कब के चले गए होते
तुम्हें याद कर-कर के यूँ रातों को ना रोते
आंखें खामोश थी इन धड़कनों को कुछ हुआ था
तुम्हारी रूह ने जब मेरे दिल को छुआ था
वो लम्हा मेरा होता है तो उसे वहीं रोक देता
तुम्हें सब से चुरा लेता और किसी को पता भी नहीं चलता
वक्त थम से गए हैं अब हवाएं भी नहीं चलती
मेरी तन्हाईयाँ अब किसी और से नहीं मिलती
मेरे पास जो भी है बेशक तुम रख लो
जितना मेरा हक है बस उतना मुझे दे दो
मेरे हो जाए तुम, तुम्हें बेइंतहा प्यार करूंगा
जिस दिन तुमसे रूठूँगा,खुद से बात नहीं करूंगा
-सतीश कुमार

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