तेरे आने से दिल खुश रहता है
तू जाता है तो गम सहता है
इक वाऱी आ, आके मिल जरा
ये तुझसे नहीं पर मुझसे कहता है।
छुप-छुप के आहे भरता है
थोड़ी सरारत भी करता है
जब देखे ये तेरा चहेरा हसीं
और जोरो से धड़कता है।
तू आँखो के सामने आता है
फिर नजरों से कहाँ छुपता है
शायद तू नहीं देखता मुझे
पर ये दिल नहीं मानता है।
हाँ दिल थोड़ा शरीफ तो है
प्यार मे ये अमीर भी है
दुआएं ये तो सबको देता है
ज्यादा तुझे, तू मेरे करीब जो है।
सुनाता हूं दिल को जो मै हाल तेरा
फिर ये तेरा दीदार करना चाहता है
मै मोह्हबत करने की सोचता हूं
ये कम्बख्त तेरा ही नाम चाहता है।
रुक जा जरा ए दिल मेरे
मोह्हबत मे कई राज छुपाना पड़ता है
उनके जाने के बाद तू टूट जाएगा
पर ये बात इसे ही कहाँ समझ आता है।
ये जब तेरी तस्वीरों को देखता है
तू होगा कहाँ फिर सोचता है
फिर तेरी याद इसे सताती है
और फिर ये मेरे पास नहीं रहता है।
मोह्हबत मुझे रास नहीं आती है
पर आदते दिल की आज भी न बदली हैं
कल जहाँ था, आज भी वहीं हैं
शिकायते करना इसकी आदत भी तो नहीं है।
ओरे खुदा तू है रहता कहाँ
आके मिल कुछ इसे बता
रातों को भी ये मुझे सताता है
अब आके तू ही इसे कुछ समझा।
कवि -सतीश कुमार

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