है जुनून तो निकल पड़
खुद में
खुद की तलाश
कर।
चलने दे
इस भीड़ को
तू खुद
नई एक राह
बन ॥
ये ज़माना न किसी का
दगा भी
देती हैं साथ दे
कर।
इन्हें ख्वाब बताकर
जो उड़ेगा
काट देंगे
ये तेरे पर
॥
सच हो
तुम तो दुनिया
परे है
झूठ का
साथ हो तो
पैर पड़े है
।
यह जान
के भी अनजान
बन
तू बस
आत्म पहचान बन
॥
न जिओ किसी की तारीफ़
पर
उन्हें सिर्फ खुद
को देखना आता
है।
छोड़ जाते
हैं आधी गलियों
में
तब हर
तरफ धुंआ नज़र
आता है॥
है जूनून
तो मत ख़तम
कर
जैसी भी हैं परिस्तिथियाँ ।
तू चल
के गिरा हो
या गिर के
चला हो
न बदल
दूसरों को देखने
का नज़रिया ॥
कवि -सतीश कुमार

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