कल मेरे भी आएंगे






तुम करो हमारे साथ कुछ भी
हम कुछ कर पाएंगे,
हँस लो आज दिन है तुम्हारा
कल मेरे भी आएंगे |

किस मक़ाम पे हम रहते है
शायद ही बता पाएंगे,
तुम्हे देखे सारा ज़माना
कल हम भी दिख जाएंगे |

सवालों को ज़रा संभाल के रखना
तुम्हे सारे जवाब मिल जाएंगे,
गए तुमसे प्रीत करने वाले
कल मेरे भी जाएंगे |

जिए किसी से फरेब करके
और ही कर पाएंगे,
अभी नज़रे नहीं मिला पाते हैं
कल सबसे मिला जाएंगे |
  
किसी और को देखे
तभी खुद को देख पाएंगे,
अभी सबकी नज़रो में गिरते हैं
कल हम भीं उठ जाएंगे |

अच्छा हैं कुछ लोग साथ हैं
उनकी आखो को हँसा पाएंगे,
सब अपनी तकलीफ बताते हैं
कल हम उसे सुकून से मिलाएंगे |

जो सपने अभी अधूरे हैं
कल हम उन्हें भी सजाएँगे,
हॅंस लो आज दिन हैं तुम्हारा
कल मेरे भी आएंगे |


          कवि -सतीश कुमार
           

Satish Kumar

Hi, I am a student but have a passion for writing and singing. So here is a collection of some immature kavita,gazal and shayeri written by me.

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